टूटने के बाद भी रोता
नहीं,
दर्द और गम को,
पीने से डरता नहीं,
दिल एक दिन भी,
दर्द के हाथों पला
नहीं,
फिर भी उसी के सितमों
पर,
उसे कुछ कहता नहीं,
दर्द की सिश्की खामोशी
मे भी,
दिल से निकली नहीं,
दरदों से रिस्ता अपना,
बड़ा पुराने जमाने का
है,
दिल का दर्द नहीं बदला,
जमाना बादल बादल गया,
दर्द जिंदगी है,
दुआएं दो की दर्द इतना
बढ़े,
दर्द वाला सामने हो,
उसके दीदार मे डैम निकले।

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