यादें
यादें अपनी चाहत की, कितनी उत्साहित करती हैं,
बीते पलो की बुनियादें, कितनी
मदमसती देती हैं,
सुंदर सुंदर सपनों की हैं,जीवन के उन अंछुए पलों की,
मन के मद होसी की,सुरमई सुलगते मुहबोलों की,
अपने ही अपने सपनों ,को बतललाने के होड़ों की ,
दिल की धक धक धड़कन के धड़कने के
कारण की ,
चलो भूल हम जाएँ उन सारे वादों
और इरादों को ,
जिनके शाये मे हम भूल चले थे अपनों
की कुर्बानी को,
वो भी दिन क्या थे जब हम भूल गए
खुद के दुर्रानी को ,
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