Wednesday, October 31, 2012

ऐसा लगता है,


शायद धोखे से मैं उनकी गली से निकल गया हूँ,
खुशबू पहचानी सी लगती है कहीं रास्ता तो नहीं भूला,
कोई आवाज नहीं आई फिर भी ठिठुक गया हूँ,
आस पास नहीं कोई मगर कोई पास मे महसूस करता हूँ,
 सब पहचाना सा लगता है मैं इसमें खोटा  जा रहा हूँ,
शाकी है न शराब है फिर भी नशा होता जा रहा है,
कोई क्या बतलाएगा मेरे कान  क्यो सुन रहे हैं,
कोई नहीं मगर चलते लोग लगते हैं,
नूपुरों की आवाज सुनाई पड़ती है, 
मेरा भ्रम है या उनका नशा हो गया है,
गली तो पहचानी है मगर कुछ अजीब लगता है,
उनके निकालने का वक्त भी नहीं हुआ फिर भी लगता है,
मे उनके पास तो नहीं आ गया जो ऐसा सब लगता है,  
शायद उनकी गली मेन मै भटक गया हूँ ऐसा लगता है,

तुमको कभी न जाने देता


 कोई सुन न पाये बातें अपनी,कानों मे कह देना,
तुम भी बैरन हो गई हो, मुसका के  बतला देना,    
मन चंचल हो जाता है जब भी तुम उदास होती हो,
लोगों से छुपने के बहाने तुम भी सोचती तो होगी,
इस तरह छुप-छुप के मिलने का अलग मजा है,
बिन बोले सारी बात बता कह देना भी एक कला है,
कभी भूल न जाना यादों मे अपनी यादें सँजो के रखना,
मौसम है मिलन का वक्त बेकार निकलने न पाये याद रखना,
बातों ही बातों मे न समय गुजर गया चलने की बेला है,
समय अगर हाथों मे होता तुमको कभी न जाने देता

यही है तेरी मेरी प्रेम कहानी,


कहीं दबी दबी सी,
कहीं छिपी छिपी सी थी,
यही है तेरी मेरी प्रेम कहानी,
कभी बारिशों मे भीगे तो महक उठी,
तेरी मेरी प्रेम कहानी,
कभी तुम कहते रह गए,
कभी हम चुप रह गए,
वो पल वो लम्हे भी,
यूं हदों मे रह गए ,
कभी बरसा गगन कभी आँखें बरस गयी,
यही है तेरी मेरी प्रेम कहानी,
कभी तुम आगे चल दिये,
कभी हम पीछे रह गए,
कदमों के वो निशान,
लहरों मे न बह जाए ,
वो कल तो ख्वाब है,
इस पल को छुपा के रखना है हमे,
यही है तेरी मेरी प्रेम कहानी।      

मौसम सावन का........


मौसम की बरसात निराली है।
धरती ने पीली साड़ी डाली है ,
रंग बिरंगी बूटे बेल चमकते,
जगह जगह पर धारी-धारी है,
हवा चल रही भीनी-भीनी सुगंध मदमाती,
फूलों की कतारें आड़ी तिरछी जैसे कोई फुलवारी,
गाँव का बरगद चिड़ियों का बसेरा है,
शाम सवेरे नौबत की सी किलकारी है,
पेड़ों पर बया के घोसले लटके,
कुछ कोनों पर घोसले औरों के रक्खे,
कौवा तो मदमाता है कोयल के घर रहता है,
बच्चे कोयल पाले खुद घूमे मदमस्त,
सारे राजा जंगल के एक दूजे पर भारी है,
बंदर सबकी चाल समझने सबकी नोट करे कारगुजारी,
रात सियारो की होती है ऊपर मुंह कर के हैं कूके,
एक दहाड़ जो शेर निकाले सब चुपके-चुपके छिपते,
कोयल और पपीहा हर दम अपने राग मे डूबे,
मौसम सावन का क्यो न हरदम रहता एक समान,
सभी झूमते रहते करके सावन की ऋतु का गुण गान ।        

Tuesday, October 30, 2012

कोई उनसे कभी भी रूठता क्यो नहीं,-Koi kyo unse ruthta kyo nahin


कोई उनसे कभी भी रूठता क्यो नहीं,
आज तक कोई  उनकी ज़ुल्फों मे भटकता क्यो नहीं, मदहोशी है की  बहकने को मन मचलता है,
नजरों से जो नजरें मिली तो मिलने को तरसता है,
आगोश ऐसा की हवा रोक ले मौसम जमाने का,
मदहोशी मे रहे हरदम भूल जाय गली अपनी को,  
चलो हम भी आजमा के देखते है उनकी नजर को,
या तो पीके झूमेंगे ,नहीं तो उनके कदमों मे गिरेंगे,
दोनों मे मेरा ही रशूक रहेगा गिराएँगे या गिरेंगे,
कोई तो अपनी भी तकदीर पे रोएगा कभी तो,
अगर पत्थर मेरे नाम का लगा होगा कभी तो,   

Koi kyo unse ruthta kyo nahin,
Aaj tak koi unki julfon men bhatakta kyo nahi ,
Madhosi hai ki bahakne ko machalta hai,
Najron se jonajre mili  to milne ko tarasta hai,
Aagosh aisa ki hava rok le mausam  jamane ka,
madhosi me rah hardam bhatak jay apni gali ko,
chalo ham bhi aajma ke dekhte hai unki najar ko,
ya to peeke  jhumenge nahi to unke kadmon me girenge,
dono men mera hi rasuk rahega girayege ya girenge,
koi to apni bhi takdeer pe royega kabhi,
agar patthar mere nam ka laga hoga kabhi.


Monday, October 29, 2012

कभी हवाएँ चलती हैं, तुमसे मिलने को,


कभी-कभी हवाएँ चलती हैं, तुमसे मिलने को,
कभी-कभी मन मचलता हैं, तुमसे मिलने को,
शायद तेरा खत मिल जाय, रोज रह देखता हूँ,
कोई अजनबी तेरी गली की खबर बताए सोंचता हूँ,
तेरी खुशबू जैसी खुशबू आए बाहर भीतर करता हूँ,
उनको भी मेरी तरह लगे लगन मन में सोचा करता हूँ ,

हर आहट पर दिल की धड़कन बढ़ जाती है घबराकर,
कहीं उनके दीदार हो, दिल में चाहत रहती है घर कर ,
जब भी किसी की डोली आती मैं प्रीतम की राह देखता हूँ,
शायद अबकी बार उनकी बारी हो आने की राह देखता हूँ,
जाने येसा क्यो लगता है की उनकी भी हालत येसी ही होगी,
मेरे प्यार मे उनकी भी खुशियाँ क्यो न आज शामिल होगी 

राहत हो जाएगी जमाने को,......


राहत हो जाएगी जमाने को,

राहत हो जाएगी जमाने को मेरे लिए आ भी जाओ,
लोग बुरा मानेंगे कुछ कह सकते हैं, आ भी जाओ,
अपनी चाहत न सही जमाने के खातिर आ जाओ,
पायल न बोले,बिंदिया न चमके फिर भी आ जाओ,
हवा  न डोले,बादल न गरजे,कोई न देखे फिर भी आ जाओ,
घटाएँ घुमड़- घुमड़ के शिकवा करेगी, फिर भी आ जाओ,
जमाना न देखे, रातों को आना,चाँदनी को भी साथ लाना,
जुगनू तेरा रास्ता बनेगे,ओढनी सितारों की ओढ़ के आना,
माहवार पैर में रचाना,काजल आँख मे डाल कर आना,
घूँघट माथे पे रखना, राहें अपने आप रास्ता बनेंगी,
कहीं अगर भुना रास्ता मेरी खुशबू मेरी ओर लाएगी,
जन्मो से बिछुड़े हैं एक बार मिलो,चाहे कभी फिर न मिलना,
राहत हो जाएगी जमाने को, एक बार प्यारी-प्यार से मिलना।  

Friday, October 26, 2012


वो बचपन की यादें,
वो अपना अलहडपन,
वो दौड़कर पेड़ से लिपटना,
और इतने ज़ोर से दबाना,
जैसे कोई अपने प्रेमी से मिले,
और पूरी ताकत से पेड़ हिलना,
बोलना आज तो हिला के ही छोडूगा,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
वो तेजी के साथ दौड़ना,
हवा से बातें करना,
उछल उछल के चलना,
कभी गोल गोल धुमना,
आकाश की ओर देखना,
बादलों मे खो के मौन हो जाना,
हवा का झोंका लगना और फिर घूमना,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
हर समय सोंचते रहना,
बात कोई नहीं पर मौन रहना,
हर एक को अजनबी की तरह देखना,
मन मे कभी हसना कभी उदास होना,
बादल को देख के मन खुश होना,
बरशात मे धूम धूम के नाचना,
काले बादल पनि दे गुरधानी दे गाना,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
कोई लौटा दे वो मदहोशी के मेरे दिन थे जो बचपन के।

उनके जाने के बाद ये याद आया,

उनके जाने के बाद ये याद आया,
अभी तो उनसे बात शुरू हुई ही नहीं,
जिस बात की खातिर आज घर से निकलीं थी,
वो प्यारी यादें तो दिल से निकली ही नहीं थी,
बादल गरज के क्यो इतना उत्पात मचाते थे,
क्यो उनको बात बताने मे इतने रोडे पद जाते थे,
किसका डर किसका गम जो आज दिल में बसे थे,
जिनकी काली छाया अपनों को इतने दूर करे थे,
भूले जब हम सारी बातें हर गम छोड़ दिया करते थे,
उनके आने पर हम खुद खुद से डरते रहते थे,
येसा भी क्या आलम था जो हम पर भारी पड़ते थे,
आज तुम्हारे आने पर इतनी बातें करलेते है  ।

आज तुम्हारे आने पर


उनके जाने के बाद ये याद आया,
अभी तो उनसे बात शुरू हुई ही नहीं,
जिस बात की खातिर आज घर से निकलीं थी,
वो प्यारी यादें तो दिल से निकली ही नहीं थी,
बादल गरज के क्यो इतना उत्पात मचाते थे,
क्यो उनको बात बताने मे इतने रोडे पद जाते थे,
किसका डर किसका गम जो आज दिल में बसे थे,
जिनकी काली छाया अपनों को इतने दूर करे थे,
भूले जब हम सारी बातें हर गम छोड़ दिया करते थे,
उनके आने पर हम खुद खुद से डरते रहते थे,
येसा भी क्या आलम था जो हम पर भारी पड़ते थे,
आज तुम्हारे आने पर इतनी बातें करलेते है  ।

दिल कहता है-dil kahta hai,man kahta hai,




Tumhare sapno ka mahal tut n jaye darta hun,
Tu kahin meri aahat se jag n jaye darta hun,
Jindagi mili magar door door jine se darta hun,
Koi hamara kabhi ruth n jaye darta hun,
Sapno men jine vale sachchai se kya lena dena,
Log jite hain bhala kaise hamse kya lena dena,
Apni jami hai apna gagan hai kisi se kya lena dena,
Baharen aati hain jati hain chaman ko kya lena dena,
Har maousam hai pyar ka mausam man kahta hai,
Bhulun saari rashmen, kshmen,  vade dil kahta hai,
Pyar ki khushbu faile sare jivan men yesa voh kahti hai,
main bhi tere sath chalun janam janammeri muraden kahti hain.

बचपन के,


वो बचपन की यादें,
वो अपना अलहडपन,
वो दौड़कर पेड़ से लिपटना,
और इतने ज़ोर से दबाना,
जैसे कोई अपने प्रेमी से मिले,
और पूरी ताकत से पेड़ हिलना,
बोलना आज तो हिला के ही छोडूगा,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
वो तेजी के साथ दौड़ना,
हवा से बातें करना,
उछल उछल के चलना,
कभी गोल गोल धुमना,
आकाश की ओर देखना,
बादलों मे खो के मौन हो जाना,
हवा का झोंका लगना और फिर घूमना,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
हर समय सोंचते रहना,
बात कोई नहीं पर मौन रहना,
हर एक को अजनबी की तरह देखना,
मन मे कभी हसना कभी उदास होना,
बादल को देख के मन खुश होना,
बरशात मे धूम धूम के नाचना,
काले बादल पनि दे गुरधानी दे गाना,
आज याद कर के लगता है क्या दिन थे बचपन के, 
कोई लौटा दे वो मदहोशी के मेरे दिन थे जो बचपन के।

मेरा मन भी पागल हैं........


मेरा मन भी पागल हैं
मेरा मन मयूर क्यो बहका बहका फिरता है,
मेरा मन भी पागल हैं चलता फिरता रहता है,
कभी गगन तो कभी धारा पर मतवाला सा चलता है,
अपने ही धुन में गाता रहता गीत प्यार के,
सपने इसके बडे बड़े पर पंख मिले इसको है छोटे छोटे ,
हवा चली जब तेज,पंख हो गए मन मयूर के छोटे छोटे, 
गगन कोई भी नाप न पाया, सागर की गहराई,  
मन में कितनी बात छिपी है कितनी इसकी गहराई,
प्यार की मूल कहाँ तक गहरी है जन पाया कोई,
खोदते खोदते पथिक थक जाता समझ न पाया कोई,
जो करते हैं प्यार सदा जीवन भर रोते-ढोते पछताते हैं, 
एक झलक प्रेयशी की पाने को,जीवन भर टकटकी लगते हैं।    

jeevan sathi ka......


Jo chalt nahin hai pairo se,
jiske pankh nahin hai havaon ke,
Jiska aana jana maousam ki,
aati jati har barsaton par,
uske aane ki rah takun main,
yah kaisa diwana pan hai,
roj nikal chaurahon par,
dhundhun uski aahat ko,
mera jeevan khoj raha hai,
yesi kisi bhikharan ko dhudhoon,
jiske aanchal men pyar to ho,
par saya  n ho bandishon ka,
usko main bhi apnau kaise jiska ,
 koi aor – chhor ka pata  mile,
kabhi dhara to kabhi gagan men,
 uski chahat rahti hardam hai,
main to rahi pagdandi ka,
mera ghar to dharti  par hai ,
chadar meri gagan se milti,
koi spna mera apna nahi,
sab sapne sab logon ke hai,
men to keval darbari hun ,
apne jeevan sathi ka.

Friday, October 19, 2012

सब कुछ बदला बदला सा लगता है,

सब कुछ बदला बदला सा लगता है,   

मेरे शाकी इतना मदमस्त कर ,
की में खुद को ख्यालों भुला जाऊँ,
तेरी ज़ुल्फों में डूब कर रास्तो भूल जाऊँ,


तेरे काजल की अधियारी को रात समझकर जागता राहून, 
तेरे पायल की आवाज को भोर की सरगम समझ सो जाऊँ,
तेरे आंचल सी हवा को झोंका समझू और खो जाऊँ,


तेरी कमर करधनी की धुन को वींडा की धुन समझूँ, 
तेरी बिंदिया की चमक को चपला जान ठिठक जाऊँ,
तेरी ज़ुल्फों को बादल समझ बहक जाऊँ,


तेरी मदमस्त चल की धमक से सिहर जाऊँ, 
तेरे बदन की खुशबू में मदमस्त होके नाचूँ ,
शायद आज कोई मुझसे मिलने वाला है, 
सब कुछ बदला बदला सा लगता है,