Saturday, January 25, 2014

HAPPY 65TH INDEPENDENCE DAY

HAPPY 65TH INDEPENDENCE DAY

To all my Friends and  Country men, Senior citizens,  Brothers, Sisters and Loving Childrens living in India and Abrod, and also all my all viewers of world.




The struggle for India's Independence began in 1857 with the Sepoy Mutiny in Meerut. Later, in the 20th century, the Indian National Congress and other political organizations, under the leadership of Mahatma Gandhi, launched a countrywide independence movement. Colonial powers were transferred to India on August 15, 1947.
The Constituent Assembly, to who power was to be transferred, met to celebrate India's independence at 11pm on August 14, 1947. India gained its liberty and became a free country at midnight between August 14 and August 15, 1947. It was then that the free India's first prime minister Pandit Jawaharlal Nehru gave his famous "Tryst with Destiny" speech. People across India are reminded of the meaning of this event - that it marked the start of a new era of deliverance from the British colonialism that took place in India for more than 200 years.
The sport of kite flying symbolizes Independence Day. The skies are dotted with countless kites flown from rooftops and fields to symbolize India's free spirit of India. Kites of various styles, sizes and shades, including the tricolor are available in the marketplaces. The Red Fort in Dehli is also an important Independence Day symbol in India as it is where Indian Prime Minister Jawahar Lal Nehru unveiled India's flag on August 15, 1947.
India's national flag is a horizontal tricolor of deep saffron (kesaria) at the top, white in the middle and dark green at the bottom in equal proportion. The ratio of the flag's width to its length is two to three. A navy-blue wheel in the center of the white band represents the chakra. Its design is that of the wheel which appears on the abacus of the Sarnath Lion Capital of Ashoka. Its diameter approximates to the white band's width and it has 24 spokes.


JAIHIND-Radhey Radhey

Tuesday, January 21, 2014

प्यास भी अजीब होती है...............

(1)
sukhe darakht bhi apnii baat kahte hai,
patti na rahiin to kya tahnii bhi kahtii hai,
tan kii khal nahii rahgayeee to kya aas to hai,
jinda hun ab talak magar pyaas bakii hai,
सूखे दरख्त भी अपनी बात कहते है,
पत्ती न रहीं तो क्या टहनियां भी कहती है
तन पर खाल नाही रहजाएगी तो क्या आस तो रहेगी,
जिंदा हूँ अब तक मगर प्यास अभी बाकी है,

chahat marii nahi hai ummiid abhi baki hai,
log abhi bhi dekhne aate hai ujade chaman ko,
shayad unko bhi yaad aaye  dekhne aur  chalii ayen  ,
mai to khush hun ki unki aarjoo abhi jindo to hai,
चाहत मरी नहीं है उम्मीद अभी बाकी है ,
लोग अभी  भी देखने आते है उजड़े चमन को,
शायद उनको भी याद आए और देखने चली आयें,
में तो खुश हूँ की उनकी आरजू अभी जिंदा तो है,

raste saaf karta hun ki kahin kanta n lage,
pair najuk hote hai unke ladkhada n jaye yahan,
pyas bhi ajeeb cheej hoti hai na bujhti hai bar bar,
peete peete jindagi intjaar men kattii jati hai,---radhey radhey
रास्ता साफ करता हूँ की कहीं कांटा न चुभे उनको 
पैर नाजुक होते है उनके यहाँ लड़खड़ा न जाये  ,
प्यास भी अजीब होती है न बुझती है बार बार ,
पीते पीते जिंदगी इंतेजार में कटती जाती है, राधे-राधे

(2)

हमने सभी से बातें करना भी बंद कर दिया,
अपनों को अपना हाल बताना भी बंद कर दिया,
कोई हमारे लिए वो न रोये आना जाना छोड़ दिया,
रास्ते न मिल जायेँ उनकी गली में जाना छोड़ दिया,
किसी को कुछ पता न चले लोगों से मिलना छोड़ दिया,
रास्ते बदल कर चलना मेरी आदत में शामिल नहीं,
रास्ते में कोई पूछे हाले दिल बताना मेरी आदत नहीं,
कोई किसी के काम आया न आया कोई गम नहीं,
मै उनके रास्ते में नहीं आया ये भी कोई कम नहीं,
चलते चलते उनके पाँव मेरे घर तक न आ जाएँ डरता हूँ,
अगर लड़खड़ाई मेरे घर पर तो थाम ही लूँगा इससे डरता हूँ,
कसम टूट जाएगी,बात से हट जाऊंगा,रास्ता बदल करके चलता हूँ,

वो खुश रहें ,सलामत रहें हर वक्त खुदा से दुआ करता चलता हूँ,

प्यार हमारे भी साथ होता तो..........

(1)

किसी का प्यार हमारे भी साथ होता तो कुछ और बात होती,
कदम मिला के कुछ दूर चले होते तो कुछ और बात होती,
दिल की बात जमाने से छिपाली होती तो कुछ और बात होती,
आइये बहारों का मौषम है बैठें पास पास तो कुछ और बात होती,
सपनों के शहर में घूमते मिलकर  तो कुछ और बात होती,
चमन में अकेले हाथों में हांथ होता तो कुछ और बात होती,
हवाएँ हमारा संदेश फिज़ाओं में ले जाती तो कुछ और बात होती,
किसी का दखल न हो जिंदगी जीने में तो कुछ और बात होती,
सनम तुम भी मेहरबान होते साथ तो तो कुछ और बात होती,
जिसे देखिये गुम है अपने गम में उदासी न रहे तो कुछ और बात होती, 
भीगा है आँचल उनका गम में मुस्कराते  तो कुछ और बात होती,
रास्ता बदल के चलते है वो साथ चलते तो तो कुछ और बात होती,
अपनों पर रहम का दिल रखते है मगर मिलते तो कुछ और बात होती,
साथी खुशनसीब हो तो सफर काटने में तो कुछ और बात होती,
(2) 

हमने जिनको  चलना सिखाया, उनने हमारा साथ छोड़ दिया,
जमाने की ठोकर लगी तो फिर, हमने झुक कर हाथ थाम लिया,
रोने की बात नहीं समझने की है, जरूरत पड़ती है जीने के लिए,
दूर तक साथ चले जो तुम्हारे,बही हम सफर के लायक होता है,

(3)

समय के साथ साथ चलते तो हमारे साथ होते,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और ही होते,
कोई हमारा भी जमाने में आप के साथ अगर होता ,
तुम्हारी याद का  रास्ता जिंदगी भर को बना होता,
मिलने की खुशी और बिछुड्ने का गम भी सोचने को,
समय भी आपका  चुराया होता तो उसकी यादें पास होती,
निशानी छोड़ जाती हमको तो यादें साथ साथ चलती होती,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और ही होते,
आपने हमारा साथ यूं नही छोड़ा कुछ तो बात बड़ी होगी,
अपनों की खातिर अपनों से दूर होने में सब की खुशी होगी,
कोई दूर जाता है तो निशान  छोड़ जाता है रास्ते पर पैरों के,
तुमने तो जमाने का चलन तोड़ दिया मिटा के निशान पैरों के,
तन की खुसबू रहती है हवाओमें लोगों के जाने के बाद राहों में, 
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और ही होते,
चलो तुमने  हमारा साथ नहीं दिया तो कोई बात नही,
किसी का  हाथ तो पकड़ा परेशानी की कोई बात नही,
उसे भी बीच राह में छोड़ दिया अकेले कोई अच्छी बात नही,
इसी को बेरुखी और जमाने का चलन कहेंगे तो अच्छी बात नही,
खुश रहो दुआ है मेरी जहां में जैसी भी रहो देनेको पास कुछ बाकी नहीं,  

हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और ही होते,a

तुम हमारे साथ दगा न दोगे.........

(1)

तुम हमारे साथ दगा न दोगे ,
यह बात मन से मान कैसे लूँ,
हमारा साथ  न छोड़ोगे कभी,
वादे पर विश्वास कैसे करलूँ,
जिनके साथ चलना आसान न था,
उनको दिल के आस पास कर लूँ,
(2) 

हमने तुमको इतना चाहा तन-मन-जीवन सारा अर्पण अपना,
तुमने हमको समझ न पाया मिलकर जीवन साथी सा अपना,
कितना मै मासूम रहा ना जाना तेरी मोहब्बत में बेबस होकर,
जरा संभल तो जाने दो फिर चले छोड़ जाना मुझे भूलाकर,
बहारें आती है सभी के जीवन में मैं भी बैठा हूँ आशा लेकर,
किस किस की तुम न बन पायी सब मुझको मालूम रहा,
फिर भी अपना सब कुछ तुम को सौंपा कितना अंजान रहा,
तुम और किसी की कैसे होगी जब तुम मेरी न हो पायी,
हमसे ज्यादा कौन करेगा तेरी हर उम्मीदों को दरकार,
अपने पन का एहसास न टूटे तुम रहो चाहे किसी की बाहों में,
मै तो हरदम चाहूँ तेरे मन मंदिर में रहना हर हालातों में,
शायद तुमको भी याद हमारी आएगी काली अधियारी रातों में,
बादल जब चमकेगा रात अंधेरी होगी पपीहा गीत प्रेम के गाएगा,
प्रियतम की याद में जब सब तडपेंगे तब तुमको मैं याद आऊँगा,
तुम दुखी मगर मत होना मै तो तेरे मन में रहता हूँ हरदम,
मन की आँखें जब जब खोलोगे मेरी तसबीर नगर आएगी,
मगर बुलाओगे  तो भी मै तुम तक न आ पाऊँगा तन मन में,
(3) 
    
खुशबू से जिसकी मै उनको पहचान लेता था,
आहट भी आती जो उनकी तो जान लेता था,
चले वो चाहे जितना सभलकर मै जान लेता था,
कोई उनको देखे तो मेरा मन खटक जाता था,
आज तुम भी मेरा दामन छुड़ा के दूर जा चुके होI

हमने किसी की याद में भूली है जिंदगी अपनी,
लगता है की किसी से दोस्ती की पहल न करूँ,
देखूँ तुझे तो भी ऐसा लगे की देखा ही नहीं,
गुजरू अगर तेरी गली से तो देखूँ न तेरी तरफ,
आज तुम भी मेरा दामन छुड़ा के दूर जा चुके होI
दिल की ये धड़कन न समझे मेरे मन की बात,
बे  वजह धड़कती रहती जब भी मई होता उदास,
किसी को क्या मालूम की क्यो वो  हरदम रहती उदास,
मेरा साथ था तो बात करती थी कम होती उदास,
वो न जाने क्यों कहाँ चली छोड़ कर मुझको उदास,
आज तो उसका मिलन दिन है शायद आए मेरे पास,
मन मे लगता है दर न जाने किस बात पर है उदास,
शायद उनकी तड़प इतनी तल्खी लिए है इसी से उदास,
मन तो मन है दिल तो दिल है हरदम साथ नहीं होता उदास,

कोई आए  न आए काम है इसका धड़कना नही होता उदास। 

Muktak


(1)  बेगाना समझे मुझे

चलो अंधेरे में किसी का शाया तो नजर आया,
पकड़ने को अंधेरे में कोई हाँथ तो नजर आया,
चलते तो हैं लोग लड़खड़ाते गिरते संभालते खुद को,
सहारा देके संभालते जो दूसरों को कहते आम खुद को,
हमें भी सहारा किसी का मिलता तो कुछ और बात होती,
कदम से कदम मिला कर निभाता तो कुछ और बात होती,
हम भी किसी के काम आ जावे इसका अरमान दिल रखते है,
कोई बे-सहारा मिले तो उसे खुद ही सभालने को तैयार रहते हैं,
अपनों ने ठुकराया  मगर अनाथो ने अपनाया उठाके गले लगाके,
किसको अपना किसे बेगाना समझे मुझे लोग मिलते गले लगाके,
 
( 2 )अपनों को मिले 

मरने की कसम ले कर पैदा हुये पले बढ़े जमाने में,
रहने को एक घरौंदा ढूंढते ताउम्र भटकते रहे जमाने में ,
चलने को तो सभी साथ चल रहे मगर रास्ता किसीको पता नहीं,
हांथ में हांथ पकडे रास्ता दिखाते सभी मंजिल किसी को पता नहीं,
वक्त की चादर से सभी का नाम पता ढका होता है,
आंधी रिश्तों की जब आती अपने भी दूर होते जाते है,
कुत्ता अगर खाजाए घर का मालपुआ घर के रखवाले कहलाएंगे,
भिखारी न पा जाए टुकड़ा भी गली बाज़ार में बदनामी कराएगे,
चलो एक बार फिर से मिल कर गले उम्मीदों के आँसू बहालें,
पता नही बाज़ार की भीड़ में फिर अपने अपनों को मिले न मिले,

(3)  फिसलन

इश्क की मदहोश गली में फिसलन बहुत है,
पैरों को कितना भी संभालो सरकते जरूर है,
गिरे तो उठाने को नहीं मिलते लोग हँसते जरूर है,
हम है ऐसे दीवाने की इस गली से निकलते जरूर है,
दो चार बार बचे गिरते गिरते पैर लड़खड़ाए जरूर है,
दामन है उनका पाना इसीसे तकदीर से लड़ना जरूरी है,
मोहब्बत में गिर गिर के संभलते मगर गिरना जरूरी है,
हर इंशान को जिंदगी में प्यार करना जीने के लिए जरूरी है,
ईंशान मोहब्बत करेगा जमाने में इसीसे उसकी गली में जाना जरूरी है
ईनाम ठोकरें मोहब्बत में होती है आशिक को संभलकर चलना जरूरी है,