Saturday, April 4, 2015

तशबीर मे सजाती है..............

टूटे हुये पत्ते भी  कभी  काम आते है,
जिंदगी को रोशनी नही देते,
मगर चमकते दमकते जरूर है,
कोई उनपर भी तहरीर लिखता है,

अपने गमों का सागर उड़ेल कर रंगता है,
एक सड़े गले अंगों की लकीरों के जालों को.  
दीवाल भी उसको तशबीर मे सजाती है,
कभी कोई उसकी भी बोली लगाकर खरीद लेता है,   

गिरे हुये पत्तों में भी चमक होती है ,
लोग उनपे भी अपनी कहानी सजाकर लिखते है,
सजाते है रंगों की कनातों से,
रखते सजाके दिल के पास में,

चाहत का एक भी कटरा लुढ़क न जाए गमों में,
जिंदगी बादल न जाये जमाने की बेरहम ठोकर में,
चलो हम भी कुछ सीख लेते हैं कुछ बेजुबानों से,

अपना भी करम बना लेते है एन महरबानों से।   

Tuesday, January 20, 2015

आबाद दुआएं................

सूखे हुये पेंड भी अपनी दर्द की दस्ता कहते हैं,
पत्ती न रहीं मगर टहनियाँ भी बात कहती हैं,

हड्डियाँ बची है मगर आस तो बाँकी है
जिंदा हूँ इसी से प्यास और आस बाँकी है,

चाहत मरती नहीं उम्मीद के सहारे जीती है,
चमन उजड़ा सही कभी तो जिंदगी जीती थी,

शायद उनको मेरी याद सताये, आजाए चमन देखने आ जाएँ,
मेरी उम्मीद कहती है अभी रुको शायद वो भूल से गुजर जाएँ,

आज भी मन में उनके लिए दुआएँ सिसकियाँ लेती है,

रहें चमन में खुश आबाद दुआएं मन में हिलोरें लेती है,   

किसी की यादें है ..........

 किसी की यादें है ..........

हमने जिनके लिए जमाना छोड़ दिया,
उनने बुरे वक़्त में साथ हमारा छोड़ दिया,
चाहत की कोई कीमत रही नहीं जमाने में,
परायों के लिए अपनों से मुह मोड लिया,

जाते जाते मूड मूड के हमें देखते है,
न रोते न मुस्कराते नजर आते हैं,
किसके लिए इतना तन तन के चल रहे हों,
अच्छे अच्छों को जमाने में बदलते देखा है,

मौशम भी बदलता, आता जाता रहता है रुक रुक के,
दिल है की उनके लिए बराबर धड़कता चुपके चुपके,
हमने गलियों में उनको उदास होके रोते देखा है,

मुसकरोते रहो हम पास पास न सही दूर दूर तो है,