प्रिये साथ छोडने की बेला है,
साथ चलने की अंतिम आस टूटती ,
कोई भी सपनों को साथ नहीं ले गया,
हर उम्मीद का एक किनारा होता है,
कितने सपने बुन बुन कर जीवन संघर्ष
रहा,
हम तुम फिर भी साथ रहे उन ज्वालाओ
मे,
आज साथ अगर चल पाते तो फिर लेते,
साथ जनम और करते वादों की पूरी
चाहत,
दिन अपना था, रात अपनी थी,मौसम भी अपना
था,
हर बेला अपने थी,सावन की फुहारे अपनी थी,
जीवन का सारा मोह तेरेसाथ है फिर
भी मैं चलता हूँ ,
कैसा रिस्ता है सारे वादे जनम जनम के तोड़ता हूँ ,
तुम मेरी यादों के साथ रहना,वक्त कट जाएगा,
मैं तेरा इंतजार वहाँ पर करके
तेरी बाट निहारूगा,
तुम आना
तुम आना, अपने मेरे सपने साथ लिए,
मैं..
मैं... मैं चलता हूँ , मैं.. मैं...
मैं चलता हूँ

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