Monday, October 8, 2012

तुम्हें क्या मालूम, मै कितना परेशान हूँ तुम्हारे लिए ........


तुम्हें क्या मालूम, मै कितना परेशान हूँ तुम्हारे लिए ........




तुमको न देख कर याद आया कि..............
क्यो तुम सवेरे ही चल देती हो घर गयी होगी
हमें  डर है कि कहीं कोई देख न ले,
तुम्हारे बिखरे बालों को,बहके काजल को,आंखो की सरमाहट को,
पैरों की बहकी चालों को,आँचल की सिलवटों को,मुख का अंगूरी रंग,
सायद  कोई मिल न जाए रस्ते मे,
तुमको न देख कर याद आया कि..............


पूंछ न ले क्यो बहकी सी चलती हो दिन मे,
मेरा नाम  न लोगी तुम चाहे कितनी भी मुसकिल क्यों न होजाए ,
प्यार को कोई भी नहीं करता है बदनाम कभी,
तुम तो मेरा नाम लिए हो आँचल मेन फिर क्यो डरती हो,
मै भी साथ चला होता तेरे घर तक पहुंचाने को, तुमको न देख कर याद आया कि..............

पर तुमने तो इतना भी मुझको करने न दिया

मै  तेरे लिए सारे संसार से लड़ सकता हूँ,

पर तुझ पर कोई उंगली उठे,

यह सह नहीं सकता, मेरे प्यार पर कोई नजर उठाये,

यह बरदस्त नहीं,

यह  तेरी आखरी विदाई है अब हमेशा साथ साथ चलेंगे,
तुम मेरी हो सपना सच करना मेरा पहला कम है आ, 

                           तुमको न देख कर याद आया कि..............

कल का सूरज तेरी मांग की चमक से निकलेगा,
सूरज को अपना जैसा कोई मिल जाएगा ,
तभी तो तुम भी चमकोगी,
प्यार पे कोई कल से आंच नहीं आएगी,
हम साथ साथ जिये  मरेंगे,
प्यार अमर होता है इस बात को सबको मानना पड़ेगा.
तुमको न देख कर याद आया कि..............              


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