Tuesday, March 8, 2016

आज की शाम

Kisii ki chaahat ko janane ka  mukaam aaya ,
Jindagii ko sanvarne , chalne ka mukam aaya,

Yun to log akele bhii jamane men chalet rahte hai,
Koi saathi miljaye humsafar to khvabon men  chalet hai,

Jindagii kitnii aasan hoti hai jab kisi ke  panv par lete hote hai,
Aankhen  dikhtii hai chehra  kale  kale baalon men chhipa hota hai,

Mahak pyar ki aatii hai sanson se madhosh kartii hai ,
Isii tarh se kat jaaye jindgii chahat banii rahti hai,

Chalo aaj ki sham yun hii gujarte hai ,
Kal ka kya bharosa kaun  kaisa hoga,

किसी की चाहत का जानने का मुकाम  आया,
जिंदगी को सँवारने,समझने का मुकाम आया ,

यूं तो लोग अकेले भी  जमाने मेन चलते रहते है,
कोई साथी मिले हमसफर बनके तो ख्वाबों में चलते हैं,  

जिंदगी कितनी आसान होती है जब किसी के पाँव पर लेते होते है ,
आँखें दिखती है चेहरा, काले-काले बालों में छिपा होता है,

महक प्यार  की आती है साँसों  से मदहोश करती है,
इसी तरह से कट जाये जिंदगी चाहत बनी रहती है,

चलो आज की शाम  यूं ही गुजरते है,
कल का क्या भरोसा  कौन कैसा होगा,       



  

Saturday, April 4, 2015

तशबीर मे सजाती है..............

टूटे हुये पत्ते भी  कभी  काम आते है,
जिंदगी को रोशनी नही देते,
मगर चमकते दमकते जरूर है,
कोई उनपर भी तहरीर लिखता है,

अपने गमों का सागर उड़ेल कर रंगता है,
एक सड़े गले अंगों की लकीरों के जालों को.  
दीवाल भी उसको तशबीर मे सजाती है,
कभी कोई उसकी भी बोली लगाकर खरीद लेता है,   

गिरे हुये पत्तों में भी चमक होती है ,
लोग उनपे भी अपनी कहानी सजाकर लिखते है,
सजाते है रंगों की कनातों से,
रखते सजाके दिल के पास में,

चाहत का एक भी कटरा लुढ़क न जाए गमों में,
जिंदगी बादल न जाये जमाने की बेरहम ठोकर में,
चलो हम भी कुछ सीख लेते हैं कुछ बेजुबानों से,

अपना भी करम बना लेते है एन महरबानों से।   

Tuesday, January 20, 2015

आबाद दुआएं................

सूखे हुये पेंड भी अपनी दर्द की दस्ता कहते हैं,
पत्ती न रहीं मगर टहनियाँ भी बात कहती हैं,

हड्डियाँ बची है मगर आस तो बाँकी है
जिंदा हूँ इसी से प्यास और आस बाँकी है,

चाहत मरती नहीं उम्मीद के सहारे जीती है,
चमन उजड़ा सही कभी तो जिंदगी जीती थी,

शायद उनको मेरी याद सताये, आजाए चमन देखने आ जाएँ,
मेरी उम्मीद कहती है अभी रुको शायद वो भूल से गुजर जाएँ,

आज भी मन में उनके लिए दुआएँ सिसकियाँ लेती है,

रहें चमन में खुश आबाद दुआएं मन में हिलोरें लेती है,   

किसी की यादें है ..........

 किसी की यादें है ..........

हमने जिनके लिए जमाना छोड़ दिया,
उनने बुरे वक़्त में साथ हमारा छोड़ दिया,
चाहत की कोई कीमत रही नहीं जमाने में,
परायों के लिए अपनों से मुह मोड लिया,

जाते जाते मूड मूड के हमें देखते है,
न रोते न मुस्कराते नजर आते हैं,
किसके लिए इतना तन तन के चल रहे हों,
अच्छे अच्छों को जमाने में बदलते देखा है,

मौशम भी बदलता, आता जाता रहता है रुक रुक के,
दिल है की उनके लिए बराबर धड़कता चुपके चुपके,
हमने गलियों में उनको उदास होके रोते देखा है,

मुसकरोते रहो हम पास पास न सही दूर दूर तो है,

Thursday, September 11, 2014

वाह रे जमाने का रिवाज

वाह रे जमाने  का रिवाज ,

दुहाई किसकी दे यारों ,शहर अपना पराया हुआ है,
भूली हुई यादें हैं जमाने का खोया हुआ सपना है,

पराये तो पराये होते हैं अपनों ने हमको भुलाया है,
जिधर देखते हैं गम ही गम सभी अपने पराए हुये हैं,

कभी हम भी जिनकी नजर की रौनक हुआ करते थे,
हमारे लिए भी धीरे धीरे खिड़कियाँ खुला करती थी,

हम भी सर को झुकाये कनखियों से उनको देखते थे,
जमाने ने हमारा सबकुछ बेमुरौवती से छीन किया है,

बहारों से उनकी इठलाती अंगड़ाती हवाएँ छीनी गई है,
शिकवे नही  है न शिकायत का गिला  है किसी से,

आपनो ने ही हमे दिल से लगाना-अपनाना छोड़ दिया,
ये दिल दरवेशो का कोई अपना और पराया नही होता. 

Dohas (couplets) composed by Jagadguru Shree Kripalu Ji Maharaj on Friendship Day

आज है फ्रेंडशिप डे , गोविन्द राधे !
साँचो फ्रेंड हरि गुरु, बस दो हैं बता दे !!

Today is Friendship Day.
Only God and Guru are our real (eternal) friends.


आज फ्रेंडशिप डे पे हे गोविन्द राधे !
मेरी मति धृति को अपना बना दे !!

On this day of Friendship day, O Govind Radhey!
Make my mind and intellect Yours.


तेरी मेरी यारी यार , गोविन्द राधे !
चोरी चोरी कब तक चलेगी बता दे !!

Our Friendship (Yours and mine), O Govind Radhey!
Till when will it continue in hiding?


तेरी मेरी लुका छिपी, गोविन्द राधे !
मेरे साथ कब तक चलेगी बता दे !!

Yours and mine (this game of) hide and seek, O Govind Radhey!
Till when will it continue with me, please tell me.


तेरी मेरी यारी यार, गोविन्द राधे !
कबहूँ न छूटे टूटे , चाहे जोर लगा दे !!

Our Friendship (Yours and mine), O Govind Radhey!
Will never break or can be taken away, however hard one may try.


तेरे मेरे बीच में हे गोविन्द राधे !
जो भी आये वाको तू आँख दिखा दे !!

Whoever comes in between us, O Govind Radhey!
Please show him an eye (in anger).

Wednesday, August 6, 2014

अपना तो सफर खत्म हुआ........


मैं तुमसे शिकायत करूँ, आँसू बहाऊ मिलने को बुलाऊ ये भी मंजूर नहीं,
कोई शिकवा करूँ गले मिलने की उम्मीद रक्खूँ  ये भी मुझे कबूल नहीं,

साँसे जो चल रही है थोड़ी आस बाकी है आज, चंद लम्हों की मेहमान हैं,
साथी को उम्मीद है चुप चाप चलेंगी क्योंकि हमसफर आज का मेहमान है,

कल की सुबह होगी तो जरूर, मगर शायद हाल पूछने वाले हम न होंगे ,
आँसू तो होंगे आँखों मे मगर,उन्हें गालों पे रोकने-पोछने वाले हाँथ न होंगे ,

चलो रुकसत के समय तो आए देखकर शुकून मिला सफर सुहाना होगा,
फिर न मिलोगे जमाने में,फिर इस राह से गुज़रोगे बात का वादा होगा,

अपना तो सफर खत्म हुआ तुमको दुआ देते है मेरे अपने खुश रहना,
आँख भर आए तो आसू न आने देना,यादों के सफर में मुशकराते रहना,

वरना मुझे लोग बदनाम करेंगे तेरा भी नाम लेंगे तिरछी आँखों में नफरत भर कर,

मुझको तेरा दुख बरदास्त नहीं होगा आसमान भी रोयेगा आँचल में पानी भर कर,