Friday, May 30, 2014

इनशान निकालना नही चाहता.......

औरत भगवान की ऐसी उपज है संसार के इनशानों को,
जिसके मोहजाल से इनशान निकलना नही चाहता,  

भगवान भी इनशान को बनाके सोचता होगा,
पता न था की इतना औरत पर फिदा होगा,
दिल की इनायत इसको दी थी अपने पास बुलाने को,
पता न था कि इनशान दिल का इतना बड़ा बीमार होगा,
एक बार फस के छूटने पर जानवर भी जाल के पास नही जाता,
ये तो कमाल का निकला, बीमार दिल को ठीक करना नही चाहता,
औरत भगवान की ऐसी उपज है संसार के इनशानों को,
जिसके मोहजाल से इनशान निकलना नही चाहता,  

इनशान भी आराम में रहे साथ जवानी का कटे रफ्ता रफ्ता,
दिल से दिल की बात करे जिंदगी कट जाये रफ्ता रफ्ता,
साथी हो कारवां हो  मेरी ओर दिल को लगाए रफ्ता रफ्ता,
मगर इनशान तो बेकार निकला डूबा संसार में रफ्ता रफ्ता,
जिंदगी गुजारी, खाली हाथ लौट रहा पास मेरे रफ्ता रफ्ता,  
औरत भगवान की ऐसी उपज है संसार के इनशानों को,

जिसके मोहजाल से इनशान निकलना नही चाहता,  

तो जिंदगी का सफर कट जाता है,,.......

मौषम सुहाना हो तो दिल बहल जाता है,
आप का साथ हो तो जिंदगी का सफर कट जाता है,
साथी साथ मे हो तो समय तेजी से कट जाता है,
यादों के सहारे सोचने का मौक़ा मिल जाता है,
जिंदगी गम से बेजार हो तो सोचना पड़ता है,
जो सोचते है उनका समय बीना बताए कट जाता है ,
 मौषम सुहाना हो तो दिल बहल जाता है,

किसी की याद तो बहाना है जीने का सहारा होता है,
उनके ख्वाबों मे खोये-खोये रहने का बहाना होता है,
अपना जमाना, उसकी यादें, बार बार याद आती  जाती है,
जिनके पास यादों का सफर होता है, हमेशा याद आते है,
मौषम सुहाना हो तो दिल बहल जाता है,

क्यों हम अपने बीते जमाने को खोजें अपनों मे,
सभी बीते कल से निकलने की होड मे परेशान है,
आज के साथ कदम मिलालों तो जमाना  तुम्हारा है,
तुम वर्तमान मे जीने लगोगे समय का सहारा होगा,
मौषम सुहाना हो तो दिल बहल जाता है,

सबकी कसती किनारे पर जा कर ठहर जाती है,
किनारे को खोजते खोजते जिंदगी निकल जाती है,  
जिंदगी भी क्या कमाल करती है सबकुछ दे के वापस लेलेती है,
जो नहीं छोडता सबकुछ उसे अपने साथ साथ कर लेती है,
मौषम सुहाना हो तो दिल बहल जाता है,

आप का साथ हो तो जिंदगी का सफर कट जाता है,