Monday, October 29, 2012

कभी हवाएँ चलती हैं, तुमसे मिलने को,


कभी-कभी हवाएँ चलती हैं, तुमसे मिलने को,
कभी-कभी मन मचलता हैं, तुमसे मिलने को,
शायद तेरा खत मिल जाय, रोज रह देखता हूँ,
कोई अजनबी तेरी गली की खबर बताए सोंचता हूँ,
तेरी खुशबू जैसी खुशबू आए बाहर भीतर करता हूँ,
उनको भी मेरी तरह लगे लगन मन में सोचा करता हूँ ,

हर आहट पर दिल की धड़कन बढ़ जाती है घबराकर,
कहीं उनके दीदार हो, दिल में चाहत रहती है घर कर ,
जब भी किसी की डोली आती मैं प्रीतम की राह देखता हूँ,
शायद अबकी बार उनकी बारी हो आने की राह देखता हूँ,
जाने येसा क्यो लगता है की उनकी भी हालत येसी ही होगी,
मेरे प्यार मे उनकी भी खुशियाँ क्यो न आज शामिल होगी 

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