Friday, October 26, 2012

आज तुम्हारे आने पर


उनके जाने के बाद ये याद आया,
अभी तो उनसे बात शुरू हुई ही नहीं,
जिस बात की खातिर आज घर से निकलीं थी,
वो प्यारी यादें तो दिल से निकली ही नहीं थी,
बादल गरज के क्यो इतना उत्पात मचाते थे,
क्यो उनको बात बताने मे इतने रोडे पद जाते थे,
किसका डर किसका गम जो आज दिल में बसे थे,
जिनकी काली छाया अपनों को इतने दूर करे थे,
भूले जब हम सारी बातें हर गम छोड़ दिया करते थे,
उनके आने पर हम खुद खुद से डरते रहते थे,
येसा भी क्या आलम था जो हम पर भारी पड़ते थे,
आज तुम्हारे आने पर इतनी बातें करलेते है  ।

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