वादा करो,
कोई वादा करो आज चाँद के वास्ते,
मिलेंगे हमेशा सब बंधन तोड़ के,
हवाएँ मजबूरीयों की चाहे कितने कांटे बिछाए,
हम चलेगे पैर अपने लहू से रंगा के,
कल कोई हमको रोके नही टोके नहीं,
येसा कभी न हुआ और होगा भी नहीं,
प्यार बना ही है मुसीबत में चलने को,
साथी के प्यार की खातिर जान देने को,
हर जनम में हम मिलते रहे है सदा,
आज भी अपनी मंजिल मिलेगी येसा विसवास है,
वक़्त चाहे जितने करले सितम हमपर,
हम चलेंगे एक बंधन में बंद कर सदा,
चाँद जमीन पर अपनी गवाही देने आएगा सदा I
No comments:
Post a Comment