मैं तुमसे शिकायत करूँ, आँसू बहाऊ मिलने को बुलाऊ ये भी मंजूर
नहीं,
कोई शिकवा करूँ गले मिलने की उम्मीद रक्खूँ ये भी मुझे कबूल नहीं,
साँसे जो चल रही है थोड़ी आस बाकी है आज, चंद लम्हों की मेहमान हैं,
साथी को उम्मीद है चुप चाप चलेंगी क्योंकि हमसफर आज का
मेहमान है,
कल की सुबह होगी तो जरूर, मगर शायद हाल पूछने वाले हम न होंगे
,
आँसू तो होंगे आँखों मे मगर,उन्हें गालों पे रोकने-पोछने वाले हाँथ
न होंगे ,
चलो रुकसत के समय तो आए देखकर शुकून मिला सफर सुहाना
होगा,
फिर न मिलोगे जमाने में,फिर इस राह से गुज़रोगे बात का वादा होगा,
अपना तो सफर खत्म हुआ तुमको दुआ देते है मेरे अपने खुश
रहना,
आँख भर आए तो आसू न आने देना,यादों के सफर में मुशकराते रहना,
वरना मुझे लोग बदनाम करेंगे तेरा भी नाम लेंगे तिरछी
आँखों में नफरत भर कर,
मुझको तेरा दुख बरदास्त नहीं होगा आसमान भी रोयेगा आँचल
में पानी भर कर,