मगर बहुत मजबूर हूँ कि मेरा दिल बदल नहीं सकता I
अपनी मर्जी से पहचान बदल सकती हो,
बिन बताए अपना ठिकाना बादल सकती हो,
लिवास का क्या जमाने का चलन बदल सकती हो,
मगर बहुत मजबूर हूँ कि मेरा दिल बदल नहीं सकता I
किसी का हांथ थाम सकती हो अपनी मर्जी से,
किसी को दिल में बसा के रख सकती हो खुशी से,
किसी की खुसियों का घरौंदा तोड़ हकती हो खुशी से,
किसी का उजड़ा चमन आबाद कर सकती हो खुशी से,
मगर बहुत मजबूर हूँ कि मेरा दिल बदल नहीं सकता I
औरों की परवाह छोड़ आओ मिल जाएँ हम दोनों,
चलो फिर से दोस्ती की कसमें खा लें हम दोनों,
कदम से कदम मिला करके चलने लगें हम दोनों,
साथ साथ खाई जो कसमें निभाने लगें हम दोनों,
मगर बहुत मजबूर हूँ कि मेरा दिल बदल नहीं सकता I
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