Thursday, November 29, 2012

प्यार में.......


किसी को क्या पता कितना गम उठाना पड़ता है प्यार में,
कोई किसी से प्यार करे तो जाने दुख क्यो होता है प्यार में, 
ठोकर खा के उठ जाता है मगर मूसिकल है उठना प्यार में,
जख्म भर्ता है दवा से दिल टूटता है तो मरहम नहीं प्यार में,
खुदा करे दुश्मन का भी दिल न टूटे कभी किसी के प्यार में,
अफ्नो से मिलता है जो जख्मेंदर्द दिखना मुसकिल प्यार में,
कोई न जाये उनकी गली में मिलेगा धोखा हि धोखा प्यार में,
उनको अपना बनाने का हुनर नहीं सिखाया किसी ने प्यार में,  
खंजर के घाव से भी गहरा घाव करती उनकी निगाहें प्यार में,
जाए तो मारे गए न जाये तो भी मारे गए हम उनके प्यार में,
काश वो भी दिल हारें किसी बेगाने परदेसी से उसके प्यार में,
पता तो चले जमाने को कैसे तड़फते है लोग किसी के प्यार में,
सब कुछ बदलता  है मगर नहीं बदला तो चलन प्यार में,
या पाये बौरात जग या जाए बौराये सब येसा होता प्यार में,
कंचन काया, आँखें मदहोश,बाल घुँघराले लगते सुंदर प्यार में,
मदहोशी की चाल मगर कदम स्थिर पर मन चंचल प्यार में,
धरती गगन हांथ में लेत हिलोरे चंचल मन येसा होता प्यार में,
साथी संग बिताई यादें बन जाती जैसे पीर पर्वत की प्यार में,
भूख न लागे प्यास मन चंचल सब बेगाने नहीं सुहाता प्यार में,
प्रेयसी की येसी दुर्दसा सबै भुलाबे तन मन बल बुदधी प्यार में,  
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