Monday, November 12, 2012

गीत मिलन के गालें


आओ एक बार साथ मिलके गीत मिलन के गालें,
भूली बिसरी यादों के रंगीन बागीचे फिर से सजालें,
कल न जाने फिर मिलने की बेला मिले न मिले,
आओ अपनी यादों के आँसू मिलके आज बहालें,
लुटते चमन के हम भी रवा दार हुआ करते थे,
आज बिछुड्ते है कभी यहीं पर मिला करते थे,  
न जाने कितने प्रेमी युगल यहाँ मिलकर रोये होंगे,
आँसू से सींची गई जमीन पर भी फूल खिले होंगे,
कल और आएंगे अपनी प्रेम कहानी लिखने वाले,
सपनों के उनमुक्त गगन में साथ मिलके उड़ने वाले, 
दुखों के सागर की गहराई में ही आँसू के मोती मिलते,
आँसू को सजोना जाने उसको ही प्यार के मोती मिलते,
प्यार लिखा जाता आँसू की स्याही में कलम डुबाके,
तकदीर बदलती साथी मिलते और बिछुडते बिना बताके,

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