Wednesday, November 7, 2012

जिंदगी है तो तुम्हें


जिंदगी है तो तुम्हें , प्यार किया करता हूँ,
जब तू है नहीं तो किसको, याद किया करता हूँ,
सब अपने भी पराए की तरह से देखने लगते हैं,
कितना बदले है चमन के लोग मिलने भी नहीं आते हैं,
मिलने जुलने नहीं आना तो मेरी गली में  क्यों आते हैं,
कहता नहीं कोई उनको इधर के मौषम नाशाद रहते हैं,
दिन मे नहीं दिख सकते तो सपनों में आया करो,
बाहों में नहीं आ सकते तो ख्वाबों में  आया करो,
दिन पराया है तो क्या हुआ रातें अपनी तो हैं,
मेरा प्यार काबिल नहीं तो क्या हुआ तुम्हारा तो है,
मेरी आँखें नहीं तो क्या हुआ तुम तो देखती हो,
मैं चल नहीं सकता तो क्या तुम तो दौड़ सकती हो,
सपने किसी आपनों के क्यो न हों रहेंगे तो हमारे पास ही,
जमाने में चले साथ-साथ मगर रहते आफ्नो के पास ही,
चलो फैशला कर लें और खो जाते हैं यादों की डरो दीवार में,
कोई तो ढूंढेगा प्यार का राही अपने निशान इन्हीं राहों में।   

No comments:

Post a Comment