Saturday, November 3, 2012

कुछ तो हो गया है,........


हवाएँ कुछ बदली–बदली सी खुसबू लेके चलने लगी है,
शायद कोई अजनबी भूल से बाग मे आ गया है,
संगीत रुन-झुन रुन-झुन सा सुनाई पड़ने लगा है,
किसी की पायल और कमर के नूपुर बजने लगे हैं,
मधुर संगीत की धुन अनुमान मन को लगवा रही है,

कोई आता तो मैंने देखा होता कुछ तो हो गया है,
मैं क्यो मदहोशी के आगोश में खोता जा रहा हूँ,
सभी कुछ न कुछ बहके-बहके से नजर आ रहे हैं,
बदली भी कुछ-कुछ आसमान पर छाने सी लगी है,
राही भी ज्यादा भटकते पगडंडी पर दिखने लगे है,
पपीहा की आवाज कुछ तो बता रही हमको लगे है,
हर पेड़ कुछ ज्यादा फूल राहों पर गिराने लगे हैं,
कोई तो मौषम में अपनी सुगंध फैलाने आया है।
कुछ तो नया होगा बहारों  का मौषम आने वाला है। 

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