Tuesday, November 6, 2012

कभी तो साथ थे,..


हम तुम मिलकर साथ-साथ चले थे,
आज अलग हैं पर कभी तो साथ थे,
आज तुम्हें शायद मेरा रूप-रंग, नाम-धाम, सोंच भूल जाएंगे,
हम तो मील के पत्थर ठहरे, कभी न कभी तो दिख जाएंगे,
बहुत बातें करी जो साथ–साथ, चल कर जमाने से छिप कर,
यादें उनकी मेरे साथ आज भी, ताजा होती हैं आप को देखकर,
चलो फिर से  मिलने का बहाना सोंचे, शायद राह निकल आये,
दो-दो कदम हम-तुम चलें, कहीं हंथ से जिंदगी न निकल जाए,
कल फिर से हमारा होगा,खुशियाँ आँगन में नाचेंगी,
भूली बिसरी यादें नवजीवन देने,खुशियाँ लेकर आएंगी।   

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