Tuesday, November 6, 2012

प्यार की अंधी गली मे......


अब तो सारे जमाने मे,
कोई भी हमारा न रहा,
प्यार की सूनी अंधी गली मे,       कोई भी अपना सहारा न रहा,
जिनने हाँथों को पकड़ कर,            खाई थी सहारा देने की कसमें,
उनने बेवाफाई से राह बदल के, गुजरने की निभाई कसंमें,  मैं जाऊ किधर हर ओर छाये, बड़े गमों के काले बादल है,
जिधर देखता हूँ अपनो सा नहीं कोई, पराये तो पराये ही हैं,
चलूँ दूर तो उम्मीद बंधे,मिल जाए कोई बने सहारा, जीने का,
मिलती कोई राह उनकी गली,फिर से हौसला मिले जीने का,    
अब कभी नाम न लेंगे तेरा,मिलने कि कभी राह न तकूँगा,
दिल का दरवाजा बंद करके सनम,सहारे तेरी यादों के जिऊँगा,
बिन तेरे ज़िंदगी कितनी उदास होगी,इसमें कैसे तन्हा रहूँगा,  
तूने मेरा साथ क्या छोडा, अब कोई दूसरा हाँथ न थामूंगा,
हमने मिलके चलने के साथ-साथ,वादे किए थे निभाएगे कैसे,
तुम तो जमाने से मजबूर हो गए हो,हम अकेले जिएंगे कैसे।    
   

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