Thursday, November 1, 2012

डरता हूँ,


तुम्हारे सपनों का महल टूट न जाए डरता हूँ,
तो कहीं मेरी आहट से जाग न जाय डरता हूँ,
जिंदगी मिली मगर दूर-दूर जीने से डरता हूँ,
कोई हमारा हमसे रूठ न जाय डरता हूँ,
सपनों मे जीने वालों को सच्चाई से क्या लेना देना, 
लोग जीते हैं भला कैसे उनसे क्या लेना देना,
अपनी जमी है अपना गगन है किसी क्या लेना देना,
बहारें आती-जाती हैं चमन को क्या लेना-देना,
हर मौसम है प्यार का मौसम दिल कहता है, 
भूल के आ सारी रस्में, कसमें,वादे  दिल कहता है,
प्यार की खुसबु फैले बागों मे मन कहता है,
मैं भी तेरे साथ-साथ चलू जनम-जन्म ऐसा अपनापन  कहता है, 
    

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