तुम्हारे सपनों का महल टूट न जाए डरता हूँ,
तो कहीं मेरी आहट से जाग न जाय डरता हूँ,
जिंदगी मिली मगर दूर-दूर जीने से डरता हूँ,
कोई हमारा हमसे रूठ न जाय डरता हूँ,
लोग जीते हैं भला कैसे उनसे क्या लेना देना,
अपनी जमी है अपना गगन है किसी क्या लेना देना,
बहारें आती-जाती हैं चमन को क्या लेना-देना,
हर मौसम है प्यार का मौसम दिल कहता है,
भूल के आ सारी रस्में, कसमें,वादे दिल कहता है,
प्यार की खुसबु फैले बागों मे मन कहता है,
मैं भी तेरे साथ-साथ चलू जनम-जन्म ऐसा अपनापन कहता है,

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