Thursday, November 8, 2012

सावन आया, सावन आया,....



सावन आया, सावन आया,

ऋतु शरद की आई ,खुशियों का गुलदस्ता लाई,
फूलों ने धरती को, रंग बिरंगी साड़ी पहनाई,
बहारें रहने को आई, तितलियों को साथ लाई,
कलियों को खिलना था और भौरों को मडराना था,

कुछ महक फूलों की कुछ हवाओं का महकना था,
चपला सा बादल भी अपनी,छाया इधर-उधर ले जाता था,
कभी फुहारें सावन कि सबके ऊपर चारो ओर फैलाता था,
ऐसे मनभावन मौसम मे,बच्चों कि तो बन आती है,
खेल कूद कि आंधी चलती, भूख प्यास दूर हो जाती है,
अपने और पराए का भेद भूल, दिलों से उदासी भागाये,
सावन कि बरसातों मे सबका, तन मन भीगे, उमंग जगाए,
राग, द्वेष, कटुता,चतुराई,घुल मिल कर मन में प्यार जगाए,

कितना सुंदर अपना देश, हर तितली पर लिखा  संदेश,
प्यार करो बुरा न मानो, भूलो और भुलाओ सभी क्लेश,
सावन आया, सावन आया, बच्चों का मन भावन सावन आया,
छोटे बड़े, नर व नारी ,पशु पंक्षी सबके मन मे प्यार जगाया। 
    

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