Thursday, November 1, 2012

किसी के खातिर आज


किसी के खातिर आज मन उदास है,
जो चला गया उसका सब राज पास है
आँधी की तरह आते और चले जाते रहते,
मेरा क्या होगा जाने पर कभी तो सोचते होते,
चलना मजबूरी है मगर रुकना भी जिंदगी है,
कोई कब तक यूं ही रहे तकता राह आने की,
चाँदनी आती है तो शीतलता बहरो मे लाती है,
उनके आते ही सब ओर से शांत सरगम गाती है,
मन मयूर नाचने को करता है मगर डरता हूँ,
कहीं उनको रूठने का बहाना तो नहीं बनाता हूँ,
बाग का हर जर्रा उनकी खुशबू पहचानता है,
आने जाने की गवाही बाग का हर कोना बनता है,     

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