Tuesday, January 21, 2014

Muktak


(1)  बेगाना समझे मुझे

चलो अंधेरे में किसी का शाया तो नजर आया,
पकड़ने को अंधेरे में कोई हाँथ तो नजर आया,
चलते तो हैं लोग लड़खड़ाते गिरते संभालते खुद को,
सहारा देके संभालते जो दूसरों को कहते आम खुद को,
हमें भी सहारा किसी का मिलता तो कुछ और बात होती,
कदम से कदम मिला कर निभाता तो कुछ और बात होती,
हम भी किसी के काम आ जावे इसका अरमान दिल रखते है,
कोई बे-सहारा मिले तो उसे खुद ही सभालने को तैयार रहते हैं,
अपनों ने ठुकराया  मगर अनाथो ने अपनाया उठाके गले लगाके,
किसको अपना किसे बेगाना समझे मुझे लोग मिलते गले लगाके,
 
( 2 )अपनों को मिले 

मरने की कसम ले कर पैदा हुये पले बढ़े जमाने में,
रहने को एक घरौंदा ढूंढते ताउम्र भटकते रहे जमाने में ,
चलने को तो सभी साथ चल रहे मगर रास्ता किसीको पता नहीं,
हांथ में हांथ पकडे रास्ता दिखाते सभी मंजिल किसी को पता नहीं,
वक्त की चादर से सभी का नाम पता ढका होता है,
आंधी रिश्तों की जब आती अपने भी दूर होते जाते है,
कुत्ता अगर खाजाए घर का मालपुआ घर के रखवाले कहलाएंगे,
भिखारी न पा जाए टुकड़ा भी गली बाज़ार में बदनामी कराएगे,
चलो एक बार फिर से मिल कर गले उम्मीदों के आँसू बहालें,
पता नही बाज़ार की भीड़ में फिर अपने अपनों को मिले न मिले,

(3)  फिसलन

इश्क की मदहोश गली में फिसलन बहुत है,
पैरों को कितना भी संभालो सरकते जरूर है,
गिरे तो उठाने को नहीं मिलते लोग हँसते जरूर है,
हम है ऐसे दीवाने की इस गली से निकलते जरूर है,
दो चार बार बचे गिरते गिरते पैर लड़खड़ाए जरूर है,
दामन है उनका पाना इसीसे तकदीर से लड़ना जरूरी है,
मोहब्बत में गिर गिर के संभलते मगर गिरना जरूरी है,
हर इंशान को जिंदगी में प्यार करना जीने के लिए जरूरी है,
ईंशान मोहब्बत करेगा जमाने में इसीसे उसकी गली में जाना जरूरी है
ईनाम ठोकरें मोहब्बत में होती है आशिक को संभलकर चलना जरूरी है,

  

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