(1)
किसी का प्यार हमारे भी साथ
होता तो कुछ और बात होती,
कदम मिला के कुछ दूर चले
होते तो कुछ और बात होती,
दिल की बात जमाने से
छिपाली होती तो कुछ और बात होती,
आइये बहारों का मौषम है
बैठें पास पास तो कुछ और बात होती,
सपनों के शहर में घूमते
मिलकर तो कुछ और बात होती,
चमन में अकेले हाथों में
हांथ होता तो कुछ और बात होती,
हवाएँ हमारा संदेश फिज़ाओं
में ले जाती तो कुछ और बात होती,
किसी का दखल न हो जिंदगी
जीने में तो कुछ और बात होती,
सनम तुम भी मेहरबान होते
साथ तो तो कुछ और बात होती,
जिसे देखिये गुम है अपने
गम में उदासी न रहे तो कुछ और बात होती,
भीगा है आँचल उनका गम में
मुस्कराते तो कुछ और बात होती,
रास्ता बदल के चलते है वो
साथ चलते तो तो कुछ और बात होती,
अपनों पर रहम का दिल रखते
है मगर मिलते तो कुछ और बात होती,
साथी खुशनसीब हो तो सफर
काटने में तो कुछ और बात होती,
हमने जिनको चलना सिखाया, उनने
हमारा साथ छोड़ दिया,
जमाने की ठोकर लगी तो फिर, हमने झुक कर हाथ थाम लिया,
रोने की बात नहीं समझने की
है, जरूरत पड़ती है जीने के लिए,
दूर तक साथ चले जो
तुम्हारे,बही हम सफर के लायक होता है,
समय के साथ साथ चलते तो हमारे
साथ होते,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और
ही होते,
कोई हमारा भी जमाने में आप
के साथ अगर होता ,
तुम्हारी याद का रास्ता जिंदगी भर को बना होता,
मिलने की खुशी और बिछुड्ने
का गम भी सोचने को,
समय भी आपका चुराया होता तो उसकी यादें पास होती,
निशानी छोड़ जाती हमको तो
यादें साथ साथ चलती होती,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और
ही होते,
आपने हमारा साथ यूं नही छोड़ा कुछ तो बात बड़ी
होगी,
अपनों की खातिर अपनों से दूर होने में सब
की खुशी होगी,
कोई दूर जाता है तो निशान छोड़ जाता है रास्ते पर पैरों के,
तुमने तो जमाने का चलन तोड़ दिया मिटा के निशान
पैरों के,
तन की खुसबू रहती है हवाओमें लोगों के
जाने के बाद राहों में,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और
ही होते,
चलो तुमने हमारा साथ नहीं दिया तो कोई बात नही,
किसी का
हाथ तो पकड़ा परेशानी की कोई बात नही,
उसे भी बीच राह में छोड़ दिया अकेले कोई
अच्छी बात नही,
इसी को बेरुखी और जमाने का चलन कहेंगे तो
अच्छी बात नही,
खुश रहो दुआ है मेरी जहां में जैसी भी
रहो देनेको पास कुछ बाकी नहीं,
हम भी साथ साथ चलते तो कुछ और
ही होते,a
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