(1)
तुम हमारे साथ दगा न दोगे ,
यह बात मन से मान कैसे लूँ,
हमारा साथ न छोड़ोगे कभी,
वादे पर विश्वास कैसे करलूँ,
जिनके साथ चलना आसान न था,
उनको दिल के आस पास कर लूँ,
हमने तुमको इतना चाहा तन-मन-जीवन
सारा अर्पण अपना,
तुमने हमको समझ न पाया
मिलकर जीवन साथी सा अपना,
कितना मै मासूम रहा ना
जाना तेरी मोहब्बत में बेबस होकर,
जरा संभल तो जाने दो फिर
चले छोड़ जाना मुझे भूलाकर,
बहारें आती है सभी के जीवन
में मैं भी बैठा हूँ आशा लेकर,
किस किस की तुम न बन पायी
सब मुझको मालूम रहा,
फिर भी अपना सब कुछ तुम को
सौंपा कितना अंजान रहा,
तुम और किसी की कैसे होगी
जब तुम मेरी न हो पायी,
हमसे ज्यादा कौन करेगा
तेरी हर उम्मीदों को दरकार,
अपने पन का एहसास न टूटे
तुम रहो चाहे किसी की बाहों में,
मै तो हरदम चाहूँ तेरे मन
मंदिर में रहना हर हालातों में,
शायद तुमको भी याद हमारी
आएगी काली अधियारी रातों में,
बादल जब चमकेगा रात अंधेरी
होगी पपीहा गीत प्रेम के गाएगा,
प्रियतम की याद में जब सब
तडपेंगे तब तुमको मैं याद आऊँगा,
तुम दुखी मगर मत होना मै
तो तेरे मन में रहता हूँ हरदम,
मन की आँखें जब जब खोलोगे
मेरी तसबीर नगर आएगी,
मगर बुलाओगे तो भी मै तुम तक न आ पाऊँगा तन मन में,
खुशबू से जिसकी मै उनको
पहचान लेता था,
आहट भी आती जो उनकी तो जान
लेता था,
चले वो चाहे जितना सभलकर
मै जान लेता था,
कोई उनको देखे तो मेरा मन
खटक जाता था,
आज तुम भी मेरा दामन छुड़ा
के दूर जा चुके होI
हमने किसी की याद में भूली
है जिंदगी अपनी,
लगता है की किसी से दोस्ती
की पहल न करूँ,
देखूँ तुझे तो भी ऐसा लगे
की देखा ही नहीं,
गुजरू अगर तेरी गली से तो
देखूँ न तेरी तरफ,
आज तुम भी मेरा दामन छुड़ा
के दूर जा चुके होI
दिल की ये धड़कन न समझे
मेरे मन की बात,
बे वजह धड़कती रहती जब भी मई होता उदास,
किसी को क्या मालूम की
क्यो वो हरदम रहती उदास,
मेरा साथ था तो बात करती
थी कम होती उदास,
वो न जाने क्यों कहाँ चली
छोड़ कर मुझको उदास,
आज तो उसका मिलन दिन है
शायद आए मेरे पास,
मन मे लगता है दर न जाने
किस बात पर है उदास,
शायद उनकी तड़प इतनी तल्खी
लिए है इसी से उदास,
मन तो मन है दिल तो दिल है
हरदम साथ नहीं होता उदास,
कोई आए न आए काम है इसका धड़कना नही होता उदास।
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