Tuesday, January 20, 2015

आबाद दुआएं................

सूखे हुये पेंड भी अपनी दर्द की दस्ता कहते हैं,
पत्ती न रहीं मगर टहनियाँ भी बात कहती हैं,

हड्डियाँ बची है मगर आस तो बाँकी है
जिंदा हूँ इसी से प्यास और आस बाँकी है,

चाहत मरती नहीं उम्मीद के सहारे जीती है,
चमन उजड़ा सही कभी तो जिंदगी जीती थी,

शायद उनको मेरी याद सताये, आजाए चमन देखने आ जाएँ,
मेरी उम्मीद कहती है अभी रुको शायद वो भूल से गुजर जाएँ,

आज भी मन में उनके लिए दुआएँ सिसकियाँ लेती है,

रहें चमन में खुश आबाद दुआएं मन में हिलोरें लेती है,   

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