कोई उनको बता दे कि हमने,रातों को जगना छोड़ दिया है,
कोई आए या न आए मिलने, हमने याद करना छोड़ दिया है,
अपना दिलतो मानता नहीं किसी को, पर हमने सोंचना छोड़ दिया,
साथ चल कर भी लोग छोड़ देंगे, अब हमने मुड़कर देखना छोड़ दिया,
कब तक लोग हमें भरमाएंगे, दिल ने भी समझना छोड़ दिया है,
अब तो रात गुजर जाती है, आँखों में जाग जाग कर ,
पर कब तक दिल को समझाना होगा बेकार बातों से,
उनका भी घर उदास क्यों रहता है लोगों की चाहत होने पर,
मैंने दिल को उदासी में जीने की, पास सारी खुशियाँ होने पर ,
उनको भी चैन मिले दुआ मेरे दिल ने करने की कसम डाली है,
मैंने अक्सर देखा है, उनका आँचल गीला रहता है हरदम,
उनको खुशियाँ मिले तो मै अपना सब कुछ भूलूँ हरदम,
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