जो पीते नहीं पैमाने से, वो क्या जाएंगे मैखाने में,
शाकी उनको राह बताती,लाने लेजाने मैखाने में,
जाम भी कितना बदनाम रहा भर जाने पर पैमाने में,
वो क्या समझेगा मय को जो आया नहीं मैखाने में,
सदा सुहागिन इसका शाकी,अमर है इसका पैमाना,
जाम बदलता बदले शाकी, नशा रखे हरदम मर्दाना,
पीते ही घूंट एक,हांथी जैसी ताकत आती,शूरवीरों जैसा दम,
पर्वत को राई करता धरती पर आकाश, मैखाने का ऐसा दम,
एक नशा पर खुसबू अनेक ,लोग मिले पर करते बातें अनेक,
पीने के पहले झूम रहे इसमें,लड़खड़ाते गिरते ही मिलते अनेक,
मैखाने में कोई नहीं उदास मिले, चाहे राजा हो या रंक भिखारी,
एक सेज ,पैमाना
एक ,नशा एक मैखाना एक,सभी यहाँ अधिकारी,
दम हो जिसके पास में पैसे, आओ मैखाने में बुझती प्यास,
गम कोशों दूर भागता तन से ,तनहाई कभी न रहती पास,
एक जाम जब जाता अंदर तन में,सब चिंताए दूर भागती,
घर कहाँ घरवाली बच्चे भाई रिसतेदार, सब चिंताए दूर भागती,
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