इतना
भी मत शरमाओ वरना टकरा जाओगी दीवारों से,
चाल
सभल के चला करो वरना टकराओगी दीवारों से,
बालों
को मत उलझाओ उंगली से टकराओगी बेगानों से,
आँखें
इतना मत झुकाओ पहचानेंगे लोग तेरे अरमानों से,
तुम्हें
देख कर बूझे दिये जल उठते हैं,
तेरे
आने से आँगन में रोशनी होती है,
तेरे
चलने की आहात से संगीत निकलता है,
तेरे
पांवों की आहट से ढ़ोलक बजने लगती है,
तेरी
खुशबू से मौषम का रंग बदलता है,
तेरे
बालों को देख देख घटाएँ आती हैं,
तेरे
काजल के बहने से बादल बनते है,
तेरी
चाल देख के हवाएँ रास्ता बदलती है,
तेरे
आँसू मोती बनके पत्तों पर चमकते है,
तेरे
जागने से रोज सुबह कलरव होती है,
तेरी
अंगड़ाई लेने से डालें आपस में लड़ती है,
तेरे
झुकते से ही बागों मे फूल खिलते हैं,
तेरे
गाते ही पंछी गुम सुम हो खो जाते हैं,
तुझे
देख पपीहा गम अपना भूल जाता है,
तू
इतनी सुंदर है कि सावन भी शरमाता है,
तेरे
प्यार को पाने आसमान से फरिसते आते हैं,
तू
जिसको मिल जाये वो खुशनशीब कहलाते हैं,

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