औरत भगवान की ऐसी
उपज है संसार के इनशानों को,
जिसके मोहजाल से
इनशान निकलना नही चाहता,
भगवान भी इनशान को
बनाके सोचता होगा,
पता न था की इतना
औरत पर फिदा होगा,
दिल की इनायत इसको
दी थी अपने पास बुलाने को,
पता न था कि इनशान
दिल का इतना बड़ा बीमार होगा,
एक बार फस के छूटने
पर जानवर भी जाल के पास नही जाता,
ये तो कमाल का निकला, बीमार दिल को ठीक करना नही चाहता,
औरत भगवान की ऐसी
उपज है संसार के इनशानों को,
जिसके मोहजाल से
इनशान निकलना नही चाहता,
इनशान भी आराम में
रहे साथ जवानी का कटे रफ्ता रफ्ता,
दिल से दिल की बात
करे जिंदगी कट जाये रफ्ता रफ्ता,
साथी हो कारवां हो
मेरी ओर दिल को लगाए रफ्ता रफ्ता,
मगर इनशान तो बेकार
निकला डूबा संसार में रफ्ता रफ्ता,
जिंदगी गुजारी, खाली हाथ लौट रहा पास मेरे रफ्ता रफ्ता,
औरत भगवान की ऐसी
उपज है संसार के इनशानों को,
जिसके मोहजाल से
इनशान निकलना नही चाहता,
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