जमाने मे जीने की कला किसे आती है,
समझना बड़ा नहीं
कुछ मुसिकिल है ,
जिनको चलना नहीं आता है राहों में ,
आज वो ही राह बताने के प्रोफेसर बने है,
जो कुछ कर नहीं पाये जीवन में ,
सबको बनाने की दुकान चलते है,
प्यार का क-क-हरा नहीं आता,
आशिकों व आशिक़ी
की बात करते हैं,
जमाने का चलन बदल गया यारों ,
रोने से भी लोग पास नहीं आते,
मुस्कराओ लोग अपने आप घेर लेंगे,
प्यार में कुर्बानी का चलन रहा है,
मांगना चाहना बदनुमा दाग माना जाता रहा,
खुद को मिटाना बर्बाद होना इसकी खूबी है,
जो मिट गया कुछ पाने कि चाहत में,
वो राही अमर बन गया प्यार कि राहों का,
जिसने छोड़ा घर बार वो बे-वतन हो गया,
जिसकी परवाह कि गयी वही दाग बन गया,
खुद को मिटाओ और इस राह में नाम कमाओ,
प्यार इतना आसान होता तो सभी कर न लेते,
न कोई शीरी, न कोई फरहाद होता जमाने में,
पत्थर खाओगे जमाने के तो हीर का दर्जा पाओगे,
प्यार के राह काकरीली है आज भी, सब बदल चुका है,
जिसे अमर होने का शौक हो वो प्यार के राह में चले,
लोग नाम लेंगे याद करेंगे ,तुम मिट चुके होगे तब तक।
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