Saturday, June 22, 2013

आँचल फटा है इस लिए राह में कांटे गिरते जाते है,

 आँचल फटा है इस लिए राह में कांटे गिरते जाते है,

कोई अपना बनने के लिए बेताब है,
मगर हम तो तनहाई में खुश रहते है,
किसी की क्या मिशाल जो हमको बुलाये,
हमने न सुनने कि कसं खाई है,
अपना बना भी ले तो बेवफाई ही करोगे, हमसे आज नहीं तो कल,
साँप को दूध पिलाने से काटना छोड़ दे फुफकारना कभी नहीं छोड़ेगा,
इंशान  बेवफा कि संतान है कभी न कभी रंग बदलेगा जरूर,
प्यार इसकी झोली में कम कांटे बहुत ज्यादा है,
आँचल फटा है इस लिए राह में कांटे गिरते जाते है,
चाहता नहीं है बेवफाई मगर आदत है हो ही जाती है।  
प्यार कि राह ऊबड़ खाबड़ है लोग चलने से रोकते है,

जो चला वो घायल, जो न चला वो भी घायल,कि चला नहीं।  

No comments:

Post a Comment